हमारे चाहने से कुछ नहीं होगा
    नदी है वो कभी वापस नहीं मुड़ती

    Ganesh gorakhpuri
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    शफ़क़त भुलाया मुफ़्लिसी को देखकर
    पैसा नहीं है बोलता किसने कहा

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    ताज को कब तक निहारूँ बैठ तन्हा
    यानी मुझ को भी बनाओ संगमरमर

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    पायाब जानकर कुछ हैं सोच में पड़े जो
    हर वक़्त थे पढ़े ये भूगोल की किताबें

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    लिफ़ाफ़े में मिला कुछ ख़ास है वर्ना
    मिला उस डाकिया से तो लिफ़ाफ़ा है

    Ganesh gorakhpuri
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    हाल कोई तो मिरा भी पूछ ले एक मर्तबा
    झूठ कैसे बोलना है सीखना मैं चाहता

    Ganesh gorakhpuri
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    सारे अधूरे हैं तिरे इक हुस्न के वो सामने
    तू जो दिखे तो रात में भी भोर हो जाए मिरा

    Ganesh gorakhpuri
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    चला आया मकाँ खाली करा कर मैं
    जले हैं आशियाने बेज़ुबाँ के भी

    Ganesh gorakhpuri
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    आजकल साफ़ है हाथ उस का
    मिल न पाया जिसे लूटने को

    Ganesh gorakhpuri
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    किया था भरोसा बहुत तुम सभी पर
    भरोसा उठा है तुम्हीं से समझ लो

    Ganesh gorakhpuri
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