जो चाहे कर लो मगर तुम्हारी किसी जफ़ा का असर न होगा
मिरी इबादत वो शय है जिस पे तिरी अना का असर न होगा
मिरी इबादत वो शय है जिस पे तिरी अना का असर न होगा
विरह की अग्नि मिरे बदन को तपा रही है जला रही है
ये इश्क़ का है बुख़ार इस पे किसी दवा का असर न होगा
मैं अपनी मर्ज़ी से उस की ज़द में हूँ सो बता दूँ कि लोगों मुझ पर
किसी बरहमन किसी नुजूमी किसी ख़ुदा का असर न होगा
तू अब न डरना मेरी दुआ है तेरी बलाएँ मैं अपने सर लूँ
ये कैसे मुमकिन है मेरी गुल-गूँ मेरी दुआ का असर न होगा
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