10
0 Likes
तुझे क्या ही पता ये ग़म हमारे
कि हो पाए नहीं जब हम हमारे
कि हो पाए नहीं जब हम हमारे
हरे ये ज़ख़्म झूठे तो नहीं थे
कि सब बेकार थे मरहम हमारे
उठाया कल नहीं था कॉल उस का
करेगी नाक में अब दम हमारे
रहा सब को हँसाता यार साकेत
कि दुख होते हैं उस से कम हमारे
4
4 Likes
ग़म नहीं हुआ तुझे जिताने का कभी मुझे
क़ाएदा नहीं पता हराने का अभी मुझे
क़ाएदा नहीं पता हराने का अभी मुझे
2
5 Likes
उस को सब तिल भर लगता है
कुछ कहने पे डर लगता है
कुछ कहने पे डर लगता है
तब कोई जल्दी उस को थी
जैसे कोई कर लगता है
चलना मत उस रस्ते पर तुम
मुश्किल जो कमतर लगता है
उस की बातों से सुंदर है
दिल का ये मंज़र लगता है
छोड़ा बस ये कह कर साकेत
तुझ
में अब अंतर लगता है।
1
4 Likes









