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ज़माने के लिए तो मर चुका हूँ
सहारा है तिरा सो जी रहा हूँ
सहारा है तिरा सो जी रहा हूँ
मुकम्मल ही समझना फिर मुझे भी
फ़क़त अब क़त्ल होना रह गया हूँ
भुलाने की है ज़िद्द-ओ-जहद जिस को
तुम्हारे इश्क़ का वो सिलसिला हूँ
जिसे अपनी मुहब्बत कह रही हो
वो कोई और है, और मैं दूसरा हूँ
मुहब्बत की नवाज़िश मौत ही है
मुझे मारो, अभी मैं अधमरा हूँ
मुहब्बत का असर मुझ पर नहीं है
यूँ ही पत्थर से मैं सर पीटता हूँ
सज़ा मुझ को अता कर तू मुनासिब
ख़ता ये है कि तुझ को चाहता हूँ
"शफ़क़" को खोजने निकला हूँ जबसे
तभी से ख़ुद कहीं पर लापता हूँ
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धोका होना, क़त्ल होना बा'द उस के भी बहुत कुछ
अब तुम्हें हम क्या बताएँ इश्क़ में क्या क्या हुआ है
अब तुम्हें हम क्या बताएँ इश्क़ में क्या क्या हुआ है
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महल ख़्वाबों ख़यालों का बना कर भी दिखाना है
अगर सोचा गया है तो सजाकर भी दिखाना है
अगर सोचा गया है तो सजाकर भी दिखाना है
हमेशा खुद-ब-खुद लड़कर वही ख़ुद मान जाती है
कभी रूठे अगर तो फिर मना कर भी दिखाना है
जिधर जाऊँ उधर करती मिरा पीछा रकीबा वो
अगर हो सामना तो आजमाकर भी दिखाना है
न हासिल है यहाँ जी कर अगर उस की मुहब्बत फिर
मरूँ तो ख़ाक में ख़ुद को मिलाकर भी दिखाना है
उमर गुज़री हमारी दिल लगी करते हुए बरबस
तो संजीदा हो दौ पैसा कमाकर भी दिखाना है
"शफ़क़" तुम हर दफा,हर वक़्त जाते हो उसे मिलने
मुहब्बत में उसे मिलने बुलाकर भी दिखाना है
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