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बहुत से लोग हैं तस्वीर में अच्छे बहुत अच्छेतेरे चेहरे पे ही मेरी नज़र हरदम ठहरती है
सुना है तुम भी शायर बन रहे होतुम्हें भी चोट गहरी लग गई क्या
मुझे जीनें की भी इच्छा नहीं हैमगर दूजा कोई रस्ता नहीं है
एक कतरा बूँद का भी है समन्दरएक लम्हा इश्क़ का भी इश्क़ ही है
मुकम्मल हो गई होती मोहब्बतवो जो इक बार मुड़कर देख लेती
हमें भी तैरना आता नहीं थानदी में डूबना तय था हमारा
अगर बेदाग़ होता चाँद तो अच्छा नहीं लगतामोहब्बत ख़ूबसूरत दाग़ है, बेदाग़ से दिल पर
नहीं आबो हवा में ताज़गी अबदवा की सीसियों में ज़िन्दगी है
दो चार दिन में ही अगर कपड़े उतर गएरिश्ता कोई भी हो मग़र ये प्यार तो नहीं
तेरी तस्वीर इतना बोलती है नहीं उतना कभी तू बोलती थी