दिल अब उदास भी नहीं न बे-क़रार है
बस ख़ाक में ही मिलने का इंतिज़ार है
बस ख़ाक में ही मिलने का इंतिज़ार है
जिस के सहारे हयात ए ज़िन्दगी का लुत्फ था
वो ग़म भी आजकल किसी पे उधार है
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मुझे तो बस सफ़र से इश्क़ है
मंज़िलें तो मुसाफ़िरों की होती है
मंज़िलें तो मुसाफ़िरों की होती है
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उस शख़्स की बस एक बात अच्छी है
कोई भी वक़्त हो याद बहुत आता है
कोई भी वक़्त हो याद बहुत आता है
हम टूट ही गए होते अगर नहीं रोते
अच्छा है, ग़म कोई काम तो आता है
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