सुकून देती थी तब मुझको वस्ल की सिगरेट
अब उसके हिज्र के फ़िल्टर से होंठ जलते हैं
बहुत मुश्किल है दर्द-ए-दिल सँभाला जा नहीं सकता
तुम्हारी याद का काँटा निकाला जा नहीं सकता
तुम्हें पाने की दिल में छटपटाहट है बहुत लेकिन
ख़ुदा ने जो लिखा क़िस्मत में टाला जा नहीं सकता
तुमने मेरी पेशानी पर होठों से जो लिक्खा है
सच बतलाऊँ ये दुनिया का सबसे उम्दा मतला है
तू अपने आप को अच्छा बताता है ये अच्छा नहीं
जो अच्छे लोग हैं ख़ुद को कभी अच्छा नही कहते