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Nityanand Vajpayee

Top 10 of Nityanand Vajpayee

Nityanand Vajpayee

Top 10 of Nityanand Vajpayee

    मेरी हिम्मत के आगे ज़ुल्मों की औक़ात ही क्या है
    मैं झुक जाऊँ बिना टूटे अगर फिर बात ही क्या है

    समुंदर हम तेरी क़ुव्वत से डर जाएँ भी क्यूँ आख़िर
    हमारी प्यास के आगे तुम्हारा गात ही क्या है

    तुम्हारी फ़ौजों की तादाद हम को क्या बताते हो
    कि सूरज को अँधेरी रात की इफ़रात ही क्या है
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    Nityanand Vajpayee
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    चराग़ों पे तोहमत लगाने चले हो
    ज़माने को फिर वरग़लाने चले हो

    अँधेरों की चादर में ख़ुद को लपेटे
    लो सूरज को ही अब बुझाने चले हो

    लुटेरे तुम्हीं हो ये सब जानते हैं
    मगर मुझ पे उँगली उठाने चले हो

    शिकायत हमें तुम से बिल्कुल नहीं है
    जो करतब तुम्हारे छुपाने चले हो

    तुम्हें रौशनी की किरण क्या थमा दी
    मकाँ ही हमारा जलाने चले हो

    पिघल कर के हथियार ही मैं बनूँगा
    मुझे आग में जो तपाने चले हो

    अजब 'नित्य' से आप कर के बग़ावत
    यूँ लंका को सोना दिखाने चले हो
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    Nityanand Vajpayee
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    मुझ में मैं अब बचा ही कितना हूँ मेरे वजूद में इतना समा गए हो आप
    बस इक झलक से कर गए पागल कैसा जादू चला गए हो आप
    Nityanand Vajpayee
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    हाँ यही सच है कि दिल मैं ने लगाया था कभी
    आस्तीं में इक सँपोले को बसाया था कभी

    वो जो रो रो के दिखाता है दिली ज़ख़्मों को अब
    मैं ने उस से भी कई ज़ख़्मों को पाया था कभी

    उस की गाली पे मुझे ग़म भी भला क्यूँ कर हो यूँ
    उस ने इन क़दमों में सर भी तो झुकाया था कभी

    टीस होती है उसे होने दो मुझ को क्या पड़ा
    दर्द से मैं ने भी दिल अपना दबाया था कभी

    जंग है उपमन्यु की जारी मगर ये ख़ुदस है
    मुझ ज़ियाले को वो यूँ ज़िद पर जो लाया था कभी
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    Nityanand Vajpayee
    7
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    कह सका हूँ चंद ही दमदार शे'र
    ज़्यादातर होकर गए बीमार शे'र

    कहते कहते जब हुआ बीमार मैं
    तब कहीं जा कर हुए दो-चार शे'र
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    Nityanand Vajpayee
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    मैं जिसे रूठकर मनाता हूँ
    उस से कुछ तो है जो निभाता हूँ

    क्या पता कौन सी क़वा'इद है
    रूठ कर जो उसे सिखाता हूँ

    मेरी रूठन उसे ख़ाली होती
    गर जो थोड़ा भी मैं सुहाता हूँ

    ऐसे पत्थर से सिर लड़ा मेरा
    उठके अबतक मैं लड़खड़ाता हूँ

    दर्द सीने में है बहुत लेकिन
    फिर भी सब को यूँ ही हँसाता हूँ

    चीख़ता ज़ोर से मैं रोने को
    उन को लगता कि खिलखिलाता हूँ

    एक वा'दा किया था जो उन से
    इस
    लिए 'नित्य' मुस्कुराता हूँ
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    Nityanand Vajpayee
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    बढ़ रहा आज क्यूँ अँधेरा है
    जाने किस ने किया झमेला है

    चार दिन ज़िंदगी बची देखो
    उस
    में कितने ग़मो का डेरा है

    जब नहीं साथ कुछ चले तेरे
    फिर भला नैन क्यूँ तरेरा है

    सब यहीं का यहीं पड़ा होगा
    साथ होगा न एक धेला है

    नेक नामी ही संग जाएगी
    और सब रैन का बसेरा है

    रौशनी नेकियों की आज कमा
    फिर भला वक़्त किस ने देखा है

    ‛नित्य' वो मिट गया ज़माने में
    जिस ने दहशत का खेल खेला है
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    Nityanand Vajpayee
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    जाने क्यूँ लोग मेरा दर्द बढ़ा देते हैं
    बातों बातों में तेरी याद दिला देते हैं

    एक चिंगारी मेरे दिल में दबाए हूँ मैं
    पस्त-फ़ितरत उसी को और हवा देते हैं

    कोई शय है कि जिसे मैं ने भुलाया था मगर
    वो उसी शै पे मेरा नाम लिखा देते हैं

    इस मुहब्बत के बिना कैसे बचेगी दुनिया
    क्यूँ वो इस जंग की दुनिया को सज़ा देते हैं

    'नित्य' मतलब के लिए प्यार जताते थे जो
    वक़्त पड़ने पे वही सच को भुला देते हैं
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    Nityanand Vajpayee
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    जीते जी मर जाना कोई खेल नहीं
    उन से इश्क़ लड़ाना कोई खेल नहीं

    काँटों से हर-सू घिरकर यूँ दर्द सहे
    गुल जैसा मुस्काना कोई खेल नहीं

    मैं ने उन को पहले ही समझाया था
    मेरा साथ निभाना कोई खेल नहीं

    मैं पत्थर हूँ दिल भी मेरा पत्थर है
    इस से सर टकराना कोई खेल नहीं

    जिन की पूजा और इबादत देश हुआ
    उन से प्रीत लगाना कोई खेल नहीं

    'नित्य' विरह में जलकर सूरज के जैसा
    शीतल चाँद सजाना कोई खेल नहीं
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    Nityanand Vajpayee
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    उखड़े उखड़े मेरे सरकार नज़र आते हैं
    जाने किस बात से बेज़ार नज़र आते हैं

    आजकल सच की फ़ज़ीहत के लिए झूठों के
    एक जुट होने के आसार नज़र आते हैं

    एक दम झूठ ही छींटाकशी फबती कसते
    लोग दुनिया में कई बार नज़र आते हैं

    राशिफल और उठानों की ख़बर भर के लिए
    लोगों के हाथों में अख़बार नज़र आते हैं

    वोट देकर के जिन्होंने तुम्हें देदी कुर्सी
    वो तो फुटपाथों पे लाचार नज़र आते हैं

    जिन को हिंदी न ही उर्दू का हुनर है कुछ भी
    उन के हाथों में ही उपहार नज़र आते हैं

    'नित्य' जो झूठ को सच कहने में रखते न कसर
    वो हर इक न्यूज़ में सौ बार नज़र आते हैं
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    Nityanand Vajpayee
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Sibgatullah AnwerSibgatullah AnwerVikas SahajVikas SahajMuntazir surajMuntazir surajParvez ShaikhParvez ShaikhAbha sethiAbha sethiAdv Aaves ShaikhAdv Aaves ShaikhShadab ShabbiriShadab ShabbiriPrakamyan GautamPrakamyan GautamBhoomi SrivastavaBhoomi SrivastavaChhayank TyagiChhayank Tyagi