Vikas Sahaj

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    उसने गले से हमको लगाया तो रो पड़े
    अपना बना के हाथ छुड़ाया तो रो पड़े

    मैंने ग़मों से कह तो दिया रहना उम्र भर
    वादा ग़मों ने अपना निभाया तो रो पड़े

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    हमारा दिल बहुत चोटिल है यारों
    तभी तो ज़िंदगी बोझिल है यारों

    सफ़र से लौट कर आया नहीं वो
    जो कहता था सफ़र कामिल है यारों

    नज़ारे याद आते हैं सफ़र के
    यहाँ जब सामने मंज़िल है यारों

    मेरे अशआर पढ़ते फिर रहे हैं
    मुझे कहते थे जो जाहिल है यारों

    वहीं पर चूम आया हूँ उसे मैं
    जहाँ गर्दन पे उसके तिल है यारों

    शरीक-ए-जुर्म अपना बस वही है
    हमारे पास जो इक दिल है यारों

    तुम्हें लगता नहीं है देखकर क्या
    'सहज' होना बहुत मुश्किल है यारों

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    ख़्वाबों की ताबीर बनी है इक लड़की
    मेरे मन की हीर बनी है इक लड़की

    दुनिया तुझ को कब का छोड़ चुके होते
    पैरों की ज़ंजीर बनी है इक लड़की

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    उदासियों को गले लगाए उदास लड़के
    भटक रहे हैं फ़रेब खाए उदास लड़के

    किसी किसी को नसीब हैं ये उदासियाँ भी
    किसी को ये भी बता न पाए उदास लड़के

    हज़ार दुख हैं दिलों में इनके जिन्हें छिपाकर
    यहाँ सभी को हँसाने आए उदास लड़के

    उदास रहना सही नहीं है ये जानकर भी
    उदास रहना न छोड़ पाए उदास लड़के

    किसी का काँधा नसीब होता तो ये भी सोते
    तमाम रातें जगे जगाए उदास लड़के

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    किसी किसी को नसीब हैं ये उदासियाँ भी
    किसी को ये भी बता न पाए उदास लड़के

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    नहीं जो सच है वही दिखाना तरस न खाना
    सदा हमें बेवफ़ा बताना तरस न खाना

    दग़ा किसी से किया नहीं है नहीं करेंगे
    अगर तुम्हें भी हो आज़माना तरस न खाना

    कभी जो तुमसे कहीं मिलें हम तो याद रखना
    हमारी हालत पे मुस्कुराना तरस न खाना

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    किसी से नाम तो जोड़े उदासी
    कहीं तो ले चले छोड़े उदासी

    बनाया दोस्त था बस सोच कर ये
    रहेगी उम्र भर थोड़े उदासी

    रखा ये फ़ैसला हमने इसी पर
    चलेंगे जिस तरफ़ मोड़े उदासी

    किसी से फ़ासला रखना पड़ा था
    बनाती राह में रोड़े उदासी

    हमेशा साथ रखते हैं इसे सो
    खिलाएगी कहीं कोड़े उदासी

    मुझे तो डर फ़क़त इस बात का है
    न मेरा साथ अब छोड़े उदासी

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    उधारी सर से ऊपर बढ़ चुकी है
    हमारी जान जोखिम में पड़ी है

    हमीं अपमान सहकर जी रहे हैं
    अना की लाश पंखे पर मिली है

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    ख़ुद से ख़ुद की अनबन हूँ मैं
    इक सुलझी सी उलझन हूँ मैं

    जिसने देखा नज़रें फेरी
    जाने कितना रौशन हूँ मैं

    मुझको पाना क़िस्मत समझो
    इक शबरी की जूठन हूँ मैं

    वो पहने या फेंके मुझको
    शहज़ादी का कंगन हूँ मैं

    नजदीकी दुःखदायी होगी
    क्रोधित शिव का नर्तन हूँ मैं

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    उलझे बालों वाली लड़की
    शाद ख़यालों वाली लड़की

    ख़ुद से इश्क़ करो ना तुम भी
    शोख़ उजालों वाली लड़की

    तुम पर इक शाइर मरता है
    पाँव में छालों वाली लड़की

    तुममें इक औरत रहती है
    इक्कीस सालों वाली लड़की

    इनमें सब उलझे रहते हैं
    साफ़ सवालों वाली लड़की

    तुमको देख के सब्ज़ हुए हम
    ज़र्द से गालों वाली लड़की

    Vikas Sahaj
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