उखड़े उखड़े मेरे सरकार नज़र आते हैं
जाने किस बात से बेज़ार नज़र आते हैं
आजकल सच की फ़ज़ीहत के लिए झूठों के
एक जुट होने के आसार नज़र आते हैं
एक दम झूठ ही छींटाकशी फबती कसते
लोग दुनिया में कई बार नज़र आते हैं
राशिफल और उठानों की ख़बर भर के लिए
लोगों के हाथों में अख़बार नज़र आते हैं
वोट देकर के जिन्होंने तुम्हें देदी कुर्सी
वो तो फुटपाथों पे लाचार नज़र आते हैं
जिन को हिंदी न ही उर्दू का हुनर है कुछ भी
उन के हाथों में ही उपहार नज़र आते हैं
'नित्य' जो झूठ को सच कहने में रखते न कसर
वो हर इक न्यूज़ में सौ बार नज़र आते हैं
— Nityanand Vajpayee















