धूल में खो चुका ज़र्रा हूँ मैं
तुम समुंदर हो, तो क़तरा हूँ मैं
तुम समुंदर हो, तो क़तरा हूँ मैं
झूट के बल न चलाओ रिश्ते
झूट से ठग के ही बिखरा हूँ मैं
धोकों ने बदली है फ़ितरत मेरी
हर ग़लत के लिए ख़तरा हूँ मैं
फ़िक्र दुनिया की न है अब कोई
सहता कोई भी न नख़रा हूँ मैं
अपने ग़म ढाल बनाए मैं ने
तब कहीं जाके तो उभरा हूँ मैं
छोड़ के मोह किया मन कुंदन
पढ़ के गीता ही तो निखरा हूँ मैं
10
1 Like
इत्र की घुले ख़ुशबू जैसे इन हवाओं में
महके इश्क़ अपना भी इश्क़ की वफ़ाओं में
महके इश्क़ अपना भी इश्क़ की वफ़ाओं में
8
0 Likes
6
0 Likes
वतन महबूब अपना, इश्क़ शिद्दत से निभाते हम
मुकर्रर इक न दिन है इश्क़ हर लम्हा जताते हम
मुकर्रर इक न दिन है इश्क़ हर लम्हा जताते हम
हैं था
में हाथ रखते जान भी क़ुर्बान उस पर ही
लिपट आँचल तिरंगे में फ़ना उस के हो जाते हम
5
0 Likes
ओढ़ के तन इश्क़ तेरा
इश्क़ का पारा चखेंगें
इश्क़ का पारा चखेंगें
3
1 Like









