नहीं है साथ में तो क्या हुआ है
ज़रा सा इश्क़ में घाटा हुआ है
मुझे धोखा वो देकर कह रही है
सनम जो भी हुआ अच्छा हुआ है
रखे थे नाम बच्चों के हमारे
ख़बर ये है जिसे बेटा हुआ है
कोई था तोड़ने की ज़िद में रिश्ता
किसी ने हाथ को पकड़ा हुआ है
बड़ी दाढ़ी बड़े बालों से समझो
मुहब्बत ने मुझे खाया हुआ है
झूठ बोले वो मिरा यार नहीं हो सकता
चाहकर भी तो नया प्यार नहीं हो सकता
मैं अकेला हूँ बहुत मुझ पे है ज़िम्मेदारी
काम हर इक तिरे अनुसार नहीं हो सकता
मुझे ये डर सताता है, कहीं तुम खो न दो मुझको
मैं जो उठ कर चला जाता हूँ तो वापस नहीं आता
मुझे झूठा भरोसा फिर दिलाया जा रहा है
मिरे दुख का तमाशा क्यों बनाया जा रहा है
तिरे होते हुए मुझको उदासी खा रही है
तिरे होते हुए मुझको सताया जा रहा है
ज़रूरत ही नचाती है भरी महफ़िल में उसको
वो जो मासूम कुछ दिन और पढ़ना चाहती है
चूम लें होंठ तुम्हारे कितना मुश्किल है
चाँद को पास बुलाने जितना मुश्किल है
यार उसके क़ीमती तोहफ़े तो लाए थे बहुत
मैं बरेली का था मैंने ला के झुमका दे दिया
तमाशा बन गया क्या क्या हमारा
समय आया नहीं अच्छा हमारा
बनाता हूँ सलीक़े से घरौंदे
ठहरता ही नहीं अपना हमारा
नहीं देखा अभी तक उस परी को
जहाँ से तय हुआ रिश्ता हमारा
परिंदों को उडाया क़ैद से सो
शिकारी से हुआ झगड़ा हमारा
मुहब्बत को मेरी समझे नहीं तुम
तजरबा ही रहा कच्चा हमारा
बेवजह बंदिशें लगाई नहीं जाती
एक लड़की मुझे भुलाई नहीं जाती
चाहता हूँ उसी से शादी मेरी हो, सो
इश्क़ में कुंडली मिलाई नहीं जाती