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फ़क़त आँखें ही देखी हैं मगर जंजाल है जी का
ज़रा सा मुस्कुरा देती तो दिल का हाल क्या होता
ज़रा सा मुस्कुरा देती तो दिल का हाल क्या होता
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चेहरे पर मुस्कान बनी है एवं आँखें नम कम हैं
लिखने की रफ़्तार थमी है शायद हिस्से ग़म कम हैं
लिखने की रफ़्तार थमी है शायद हिस्से ग़म कम हैं
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तब हँसना गाना लिखता था अब रोना-धोना लिखता हूँ
तब इश्क़ मुहब्बत कहता था अब जादू-टोना लिखता हूँ
तब इश्क़ मुहब्बत कहता था अब जादू-टोना लिखता हूँ
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