मुँह को खोले आई है तन्हाई है
कितनी ठोकर खाई है तन्हाई है
कितनी ठोकर खाई है तन्हाई है
मुझ से ग़ुस्सा सारी तेरी बहने हैं
तुझ से ग़ुस्सा भाई है तन्हाई है
अपने ही वादों को तोड़ा है तू ने
किस की क़सम निभाई है तन्हाई है
उस के ग़म में चाक़ू उठाना था भाई
तू ने क़लम उठाई है तन्हाई है
इश्क़-ए-फ़ानी में चीज़ें मिलना तय है
ग़म है दुख है जुदाई है तन्हाई है
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घर ले आया उठा के मौला
खा के ज़हर थे बैठे मौला
खा के ज़हर थे बैठे मौला
फिर शीशे पे मारो चाकू
दिल शीशे पे बना के मौला
मुझ को जानते है ये सब बस
इक मैं और दो कमरे मौला
उस ने कुछ ग़ज़लें है सुनाई
सुनने लगे फिर बहरे मौला
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साथ निभाया जा सकता है
रूह को पाया जा सकता है
रूह को पाया जा सकता है
सोच समझ कर साथी चुनना
साथ भी जाया जा सकता है
मिला हो ज़हर में इश्क़ अगर तो
ज़हर भी खाया जा सकता है
निभा सको तो निभा ही लेना
इश्क़ निभाया जा सकता है
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