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तेरी एक खु़मारी है
जो कि सब पे भारी है
जो कि सब पे भारी है
मुझ को तो मुहब्बत है
तुझ को करनी ख़्वारी है
मेरा मुझ
में है ही क्या
तेरी ख़ुशबू तारी है
बे-वफ़ा तो तू है पर
जैसी भी है प्यारी है
इश्क़ तो है लेकिन जो
इश्क़ है अकारी है
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तुम भी बेहाल थे हम भी बेहाल थे
थी मुहब्बत सो ख़ुश और आमाल थे
थी मुहब्बत सो ख़ुश और आमाल थे
याद है क्या तुम्हें वो मिलन आख़िरी
अश्रुओं से जो भीगे हुए गाल थे
मन में हलचल-सी थी दिल ये बेचैन था
पसरे जीवन के आगे जो जंजाल थे
सोचता हूँ मैं जब भी वो दिन वस्ल के
सोचता हूँ कि दिन कितने ख़ुशहाल थे
दूसरी बेंच पर था मैं बैठा हुआ
तुम जो आए हुए फिर बुरे हाल थे
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