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कुछ नहीं होता है क़सम तोड़ोमैंने सिगरेट जला के देख लिया
किसी के साथ वो दो पाँव आज चलने लगे हम अपनी आँख के साथ हाथ भी मसलने लगे
तो क्या ऐसे ही रोना आ गया थानहीं वो याद लहजा आ गया था
तेरे लब से जब तक पुकारा न जाऊँमैं पंखे से तब तक उतारा न जाऊँ
मेरे अश'आर पढ़ने वाले लोग तेरी तस्वीर माँग बैठे हैं
अगर तू ख़ुश है मेरी हार से तो मेरी हर जीत से नफ़रत है मुझको
जब भी कहता हूँ कब मिलेंगे हमटाल देता है क्या पता कह कर
मैं पहले झूठ पर हकलाया उससेफिर उस के बाद माहिर हो गया था
बूढ़ी बोझल सूखी आँखें देख रही हैं हैरत सेकच्ची उम्र के लड़कों ने कुछ ऐसी बातें लिक्खी हैं
ख़बर मिली है स्टेशन पर तुम भी आने वाली होरेल को पीछे छोड़ दीया है साँसों की रफ़्तारों ने