पहली बार ख़ुशी हुई है कुछ खोने की
कोई वजह नहीं बाकी अब रोने की
प्यार कभी भी हो सकता है लोगों को
उम्र नहीं होती है पागल होने की
ऐसा था विश्वास पिया के आने का
सीता ने ठुकरा दी लंका सोने की
फ़िल्म कहीं से भी दिखती हो बढ़िया पर
सीटें तेज़ी से भरती हैं कोने की
साथ रहे हैं बस तन्हाई और सुख़न
मेरी तरफ़दारी हर पल इन दो ने की
वैसे तो हम यार भुला भी देते पर
ज़ख़्म दिए हैं उसने मेरे सीने पर
इतने दिन तक साथ रहे हैं हम दोनों
आदत सब जाएँगी उसके बच्चे पर
अब तुम बतलाओगे उसके बारे में
देखो इक तिल और है उसके कंधे पर
जिस घर में बस माँ हो , मैंने देखा है
फिर ज़िम्मेदारी होती है बेटे पर
मुतअस्सिर हैं यहाँ सब लोग जाने क्या समझते हैं
नहीं जो यार शबनम भी उसे दरिया समझते हैं
हक़ीक़त सारी तेरी मैं बता तो दूँ सर-ए-महफ़िल
मगर ये लोग सारे जो तुझे अच्छा समझते हैं
"याद रखेंगे प्यार तुम्हारा"
जा रहे तुम पता है मुझको
लौट के अब ना बाद आओगे
झूठ ही कह दो मन रखने को
यार बहुत तुम याद आओगे
जैसे हम गमजदा हो रहे
नयन से आँसू जुदा हो रहे
कुछ भी तो अब बचा नहीं है
प्राण देह से विदा हो रहे
एक दफा तुम बोल तो देतीं
हमने था सौ बार पुकारा
याद रखेंगे प्यार तुम्हारा
नया नया चेहरा होगा
नई नई यारी होगी
इक रोज़ वो दिन आएगा
शादी की तैयारी होगी
दिल न लगेगा कहीं पे भी और
तबियत भारी भारी होगी
मेंहदी रची हथेली होगी
दुल्हन नई नवेली होगी
पल ये ना लौट के बाद आएगा
तब तुमको फिर याद आएगा
नाम का वो चुपके से लिखना
अपनी मेंहदी में यार हमारा
याद रखेंगे प्यार तुम्हारा
करवाचौथ का दिन आएगा
और हमारे बिन आएगा
तुम तो अर्घ करोगी छत पर
चाँद हमारा छिन जाएगा
कोई अपना सारा डर रख देगा
गोद में तेरी सर रख देगा
झुका के पलकें फिर धीरे से
गाल पे तेरे अधर रख देगा
फिर वो इक टक देखेगा
चेहरा और श्रंगार तुम्हारा
याद रखेंगे प्यार तुम्हारा