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दोस्त मालूम था इक दिन तू पराई होगी
पर ये सोचा न था इस तरह जुदाई होगी
पर ये सोचा न था इस तरह जुदाई होगी
क्या हुआ होगा तेरे जाने से ये याद नहीं
इतना तय है कि मेरी आँख भर आई होगी
आसमानों में बने जोड़े बिछड़ जाएँगे
ज़ख़्म खाए हुए लोगों की सगाई होगी
रेगज़ारों पे कई चाँद चमकते होंगे
शब में सरदार ने जब शमअ बुझाई होगी
मेरी बे-वक़्त तरक़्क़ी से मेरे अपनों के
दिल में अफ़सोस मगर लब पे बधाई होगी
ज़िंदगी अपनी चमकदार बनाने के लिए
आज से रोज़ मुक़द्दर की घिसाई होगी
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तीरगी का न उजालों का अज़ाख़ाना है
दिल मिरा बीते ज़मानों का अज़ाख़ाना है
दिल मिरा बीते ज़मानों का अज़ाख़ाना है
किस ने सोचा था हमें साॅंस की क़िल्लत होगी
मुल्क अब दर्द के मारों का अज़ाख़ाना है
टूट के आते हैं इस सिम्त ही गिरने वाले
ये ज़मीं या'नी सितारों का अज़ाख़ाना है
सठ के घर में हैं गिरवी के बहुत से ज़ेवर
ये तिजोरी तो ख़ज़ानों का अज़ाख़ाना है
बैठके रोते हैं वो अपनी बुझी क़िस्मत पर
चाँदनी रात चराग़ों का अज़ाख़ाना है
उनपे रोता हूँ मैं जिनपे नहीं रोता कोई
चश्म-ए-नाचीज़ हज़ारों का अज़ाख़ाना है
ग़म पलटने के लिए जॉन को पढ़ लेते हैं
शा'इरी उन की जवानों का अज़ाख़ाना है
जिन के रोने से लरज़ जाते हैं दोनों आलम
कर्बला ऐसे घरानों का अज़ाख़ाना है
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बिना पर का परिंदा कर रहे हैं
मुझे ये ख़्वाब अंधे कर रहे हैं
मुझे ये ख़्वाब अंधे कर रहे हैं
बिठाकर हर दफ़ा पिछली सफ़ों में
मुझे ये लोग ज़ाया' कर रहे हैं
फ़क़त कुछ झूठे वादे ख़र्च कर के
बहुत से दिल का धंधा कर रहे हैं
सभी ने एक अफ़साना पढ़ा है
तेरी जो जो तमन्ना कर रहे हैं
लगाऍंगे दवा जल्दी भी क्या है
अभी तो ज़ख़्म गहरा कर रहे हैं
ख़ुदा उन के भी कपड़े साफ़ रक्खे
मेरा दामन जो मैला कर रहे हैं
अभी एक नूर उतरेगा यहाँ पर
अभी सरवर अँधेरा कर रहे हैं
मोहब्बत करने की हिम्मत नहीं है
मगर हम इस्तिख़ारा कर रहे हैं
किए थे हम ने तुम से जितने वादे
वो सब तोड़ेंगे वा'दा कर रहे हैं
हिफ़ाज़त के लिए रहते हैं पीछे
उसे लगता है पीछा कर रहे हैं
नहीं है कारख़ाने में कोई ग़म
मगर हम शे'र पैदा कर रहे हैं
वहाँ ऊँचाई पे सब बँट चुका है
ज़मीं पे लोग झगड़ा कर रहे हैं
छुपा रक्खा है दिल में नाम उस का
मोहब्बत में तक़य्या कर रहे हैं
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