जब भी करती थी वो नदी बातें
करती थी सिर्फ़ प्यास की बातें
हम कि चेहरे तो भूल जाते हैं
याद रह जाती हैं कई बातें
फूल देखें तो याद आती हैं
आप की ख़ुशबुओं भरी बातें
बीती बातों पे ऐसे शे'र कहो
शे'र से निकले कुछ नई बातें
आप की चुप तो जानलेवा हैं
मुझ से कहिए भली बुरी बातें
— Vikram Sharma















