Vikram Sharma

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@vikram-sharma

Vikram Sharma shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Vikram Sharma's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal

फिर से मिलने आ गईं तन्हाइयाँ
क्यों नहीं खुलते हैं दफ़्तर रात में

Vikram Sharma

उदासी जैसे कि उसके बदन का हिस्सा है
अधूरा लगता है वो शख़्स अगर उदास न हो

Vikram Sharma
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ये कैसे सानिहे अब पेश आने लग गए हैं
तेरे आगोश में हम छटपटाने लग गए हैं

बहुत मुमकिन है कोई तीर हमको आ लगेगा
हम ऐसे लोग जो पँछी उड़ाने लग गए हैं

Vikram Sharma
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सोचता हूँ कि दिले ज़ार का मतलब क्या है
एक हँसते हुए बीमार का मतलब क्या है

आप कहते हैं कि दीवार गिरा दी जाए
आपकी नज़रों में दीवार का मतलब क्या है

Vikram Sharma
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तुम मुहब्बत से नहीं मुझसे ख़फ़ा हो शायद
तुम अगर चाहो तो पिंजरा भी बदल सकते हो

मुन्तज़िर हूँ मैं सो नंबर भी नहीं बदलूँगा
और तुम शहर का नक्शा भी बदल सकते हो

Vikram Sharma
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हो गयी ज़ाया दलीलें फिर सभी
फिर से उसने कह दिया तेरी क़सम

Vikram Sharma
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फिर से मिलने आ गयीं तन्हाइयाँ
क्यूँ नही खुलते हैं दफ़्तर रात में

Vikram Sharma
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उम्र के आखिरी मुकाम में हम
मिल भी जाए तो क्या खुशी होगी

क्या सितम तुमको देखने के लिए
हमको दुनिया भी देखनी होगी!

Vikram Sharma
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किस काम के वो फूल जो सबने दिए मुझे
बेहतर है तेरे हाथ का खंजर लगे मुझे

Vikram Sharma
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जो भी होना था हो गया छोड़ो
अब मैं चलता हूँ रास्ता छोड़ो

अब तो दुनिया भी देख ली तुमने
अब तो ख़्वाबों को देखना छोड़ो

Vikram Sharma
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मिरे किरदार! जाने दे नज़रअंदाज कर दे
ख़ुदा की फ़िल्म है ये आदमी से क्या शिकायत

Vikram Sharma
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जिनसे उठता नहीं कली का बोझ
उनके कन्धों पे ज़िन्दगी का बोझ

वक़्त जब हाथ में नही रहता
किसलिए हाथ पर घड़ी का बोझ

Vikram Sharma
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