@vikram-sharma
Vikram Sharma shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Vikram Sharma's shayari and don't forget to save your favorite ones.
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ये कैसे सानिहे अब पेश आने लग गए हैं
तेरे आगोश में हम छटपटाने लग गए हैं
बहुत मुमकिन है कोई तीर हमको आ लगेगा
हम ऐसे लोग जो पँछी उड़ाने लग गए हैं
सोचता हूँ कि दिले ज़ार का मतलब क्या है
एक हँसते हुए बीमार का मतलब क्या है
आप कहते हैं कि दीवार गिरा दी जाए
आपकी नज़रों में दीवार का मतलब क्या है
तुम मुहब्बत से नहीं मुझसे ख़फ़ा हो शायद
तुम अगर चाहो तो पिंजरा भी बदल सकते हो
मुन्तज़िर हूँ मैं सो नंबर भी नहीं बदलूँगा
और तुम शहर का नक्शा भी बदल सकते हो
उम्र के आखिरी मुकाम में हम
मिल भी जाए तो क्या खुशी होगी
क्या सितम तुमको देखने के लिए
हमको दुनिया भी देखनी होगी!
जो भी होना था हो गया छोड़ो
अब मैं चलता हूँ रास्ता छोड़ो
अब तो दुनिया भी देख ली तुमने
अब तो ख़्वाबों को देखना छोड़ो
मिरे किरदार! जाने दे नज़रअंदाज कर दे
ख़ुदा की फ़िल्म है ये आदमी से क्या शिकायत
जिनसे उठता नहीं कली का बोझ
उनके कन्धों पे ज़िन्दगी का बोझ
वक़्त जब हाथ में नही रहता
किसलिए हाथ पर घड़ी का बोझ