आप को लगता रहे हिज्र भलाई का सबब
दिल किसी तौर न समझेगा जुदाई का सबब
और क्या चाहता है तुम से मुहब्बत का असीर
जानना चाहता है अपनी रिहाई का सबब
देर से चुप पड़े दरिया ने नमक फेंका है
पूछता होगा मेरी आबला-पाई का सबब
— Vikram Sharma
दिल किसी तौर न समझेगा जुदाई का सबब
और क्या चाहता है तुम से मुहब्बत का असीर
जानना चाहता है अपनी रिहाई का सबब
देर से चुप पड़े दरिया ने नमक फेंका है
पूछता होगा मेरी आबला-पाई का सबब
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