ख़याल सा है कि तू सामने खड़ा था अभी

ग़ुनूदगी में हूँ शायद मैं सौ गया था अभी

फिर उस की शक्ल ख़यालों में साफ़ बनने लगी
ये मस्‍अला तो वही है जो हल हुआ था अभी

सुना है फिर कोई मुझ को बचाना चाहता है
किसी तरह तो मिरा फ़ैसला हुआ था अभी

यहीं खड़ा था वो आँखों में कितने ख़्वाब लिए
मैं उस को उस का नया घर दिखा रहा था अभी

उसी के बारे में सोचा तो कुछ न था मा’लूम
उसी के बारे में इतना कहा सुना था अभी

— Shariq Kaifi

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