अज़ाब कोई हवाओं पे आने वाला है
जहाँ चराग़ नहीं है वहाँ उजाला है
तेरी तरफ़ कोई उँगली उठे तो लगता है
किसी ने मेरे गिरेबाँ पे हाथ डाला है
उसे गए हुए दो चार दिन हुए होंगे
मगर गली की उदासी ने मार डाला है
हमारे अहद के लड़के वफ़ा नहीं करते
ये वहम भी तेरे दिल में हमीं ने डाला है
हमारे पास यही लफ़्ज़ है तुम्हारे लिए
हमारे पास इन्हीं मोतियों की माला है
— Shakeel Jamali















