मौसम की रा'नाई थे
हम कच्ची अमराई थे
सब वादों ने झूठ कहा
सारे ख़्वाब हवाई थे
गिरे छिटक के दूर हुए
हम चुटकी भर राई थे
मेरे हिस्से आए जो
सब के सब हरजाई थे
मिल के भी न शाद हुए
हम दोनों तन्हाई थे
— Ritesh Rajwada
हम कच्ची अमराई थे
सब वादों ने झूठ कहा
सारे ख़्वाब हवाई थे
गिरे छिटक के दूर हुए
हम चुटकी भर राई थे
मेरे हिस्से आए जो
सब के सब हरजाई थे
मिल के भी न शाद हुए
हम दोनों तन्हाई थे
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