कोई समझे नहीं बतियाँ हमारी
बड़ी दिक्कत में हैं ख़ुशियाँ हमारी
किसी की ख़ुशबुओं के कर्ज में हैं
कई शा
में कई रतियाँ हमारी
हमें उम्मीद थी कुछ तो कहेगा
वो चुप से सुन रहा बतियाँ हमारी
सभी ख़्वाबों ने मिल कर झूठ बोला
सो आख़िर थक गईं अखियाँ हमारी
— Ritesh Rajwada















