तेरी तस्वीर मोअत्तल नहीं होती मेरे दोस्त

वरना दीवार तो पागल नहीं होती मेरे दोस्त

इश्क़ में जीत मुक़द्दर से है मेहनत से नहीं
ऐसे खेलों में रिहर्सल नहीं होती मेरे दोस्त

उस ने बेचैनी भी बख़्शी है बड़ी मुश्किल से
और बेचैनी मुसलसल नहीं होती मेरे दोस्त

— Muzdum Khan

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