Muzdum Khan

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@muzdam-khan

Muzdum Khan shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Muzdum Khan's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal

साल के तीन सौ पैंसठ दिन में एक भी रात नहीं है उसकी
वो मुझे छोड़ दे और ख़ुश भी रहे इतनी औक़ात नहीं है उसकी

Muzdum Khan
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क्या हुआ जो मुझे हम-उम्र मोहब्बत न मिली
मेरी ख़्वाहिश भी यही थी कि बड़ी आग लगे

Muzdum Khan
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चले जाओ मगर इतनी मदद करते हुए जाओ
मैं तन्हा मर न जाऊँ दो अदद करते हुए जाओ

चराग़ों की जलन से ख़त्म हो जाती है तारीक़ी
हसद करते हुए आओ हसद करते हुए जाओ

Muzdum Khan
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बस एक मैं था जिससे सच मुच में दिलबरी की
वरना हर आदमी से उसने दो नंबरी की

जिस बात में भी हमने ख़ुद को अकेला रक्खा
बाग़ात में भी हमने जोड़ों की मुख़बरी की

Muzdum Khan
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तुम नहीं उतरोगी मैं उतरूँगा गहराई में
पगड़ी बड़ी होती है दुपट्टे से लंबाई में

Muzdum Khan
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न कोई बीन बजाई न टोकरी खोली
बस एक फोन मिलाने पे साँप बैठा है

कोई भी लड़की अकेली नज़र नहीं आती
यहाँ हर एक ख़जाने पे साँप बैठा है

Muzdum Khan
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न सिर्फ़ ये कि जहन्नुम ख़िताब में भी नहीं
अली के मानने वालों के ख़्वाब में भी नहीं

Muzdum Khan
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हम दो बंदे हैं और सिगरेट एक
अब ख़बर होगी दोस्ती की दोस्त

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