@muzdam-khan
Muzdum Khan shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Muzdum Khan's shayari and don't forget to save your favorite ones.
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साल के तीन सौ पैंसठ दिन में एक भी रात नहीं है उसकी
वो मुझे छोड़ दे और ख़ुश भी रहे इतनी औक़ात नहीं है उसकी
चले जाओ मगर इतनी मदद करते हुए जाओ
मैं तन्हा मर न जाऊँ दो अदद करते हुए जाओ
चराग़ों की जलन से ख़त्म हो जाती है तारीक़ी
हसद करते हुए आओ हसद करते हुए जाओ
बस एक मैं था जिससे सच मुच में दिलबरी की
वरना हर आदमी से उसने दो नंबरी की
जिस बात में भी हमने ख़ुद को अकेला रक्खा
बाग़ात में भी हमने जोड़ों की मुख़बरी की
न कोई बीन बजाई न टोकरी खोली
बस एक फोन मिलाने पे साँप बैठा है
कोई भी लड़की अकेली नज़र नहीं आती
यहाँ हर एक ख़जाने पे साँप बैठा है
न सिर्फ़ ये कि जहन्नुम ख़िताब में भी नहीं
अली के मानने वालों के ख़्वाब में भी नहीं