मैं परेशान वो दुखी हुई है
ये मोहब्बत है तो बड़ी हुई है
कुछ भी अपना नहीं है मेरे पास
बद-दुआ भी किसी की दी हुई है
उस ने पूछी है आख़िरी ख़्वाहिश
और मोहब्बत भी मैं ने की हुई है
आज ग़ुस्सा नहीं पिऊॅंगा मैं
आज मैं ने शराब पी हुई है
मैं तुम्हें इतनी बार चाहता हूँ
जितनी औरत पे शा'इरी हुई है
बच्चा गिरवा के क्या मिलेगा तुम्हें
दुनिया पहले बहुत गिरी हुई है
— Muzdum Khan















