Hug Shayari
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Hug Shayari

    जो शेर समझे मुझे दाद वाद देता रहे
    गले लगाए जिसे ग़म समझ में आ जाए

    Balmohan Pandey
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    घर में भी दिल नहीं लग रहा काम पर भी नहीं जा रहा
    जाने क्या ख़ौफ़ है जो तुझे चूम कर भी नहीं जा रहा

    रात के तीन बजने को है यार ये कैसा महबूब है
    जो गले भी नहीं लग रहा और घर भी नहीं जा रहा

    Tehzeeb Hafi
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    हर मुलाक़ात पे सीने से लगाने वाले
    कितने प्यारे है मुझे छोड़ के जाने वाले

    Vipul Kumar
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    मोहब्बतों में दिखावे की दोस्ती न मिला
    अगर गले नहीं मिलता तो हाथ भी न मिला

    Bashir Badr
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    वो अक़्ल-मंद कभी जोश में नहीं आता
    गले तो लगता है आग़ोश में नहीं आता

    Farhat Ehsaas
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    मैं अपने बाप के सीने से फूल चुनता हूँ
    सो जब भी साँस थमी बाग़ में टहल आया

    Hammad Niyazi
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    न जाने क्यूँ गले से लगने की हिम्मत नहीं होती
    न जाने क्यूँ पिता के सामने बेटे नहीं खुलते

    Kushal Dauneria
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    शक है तुझे अगर ये अब भी गुदाज़ है दिल
    तो सीने से कभी ये पत्थर निकाल मेरा

    Abhay Aadiv
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    गले सब मिल रहे हैं उससे हँसकर
    हमारा हक़ तो मारा जा रहा है

    Pooja Bhatia
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    इस तरह रोते हैं हम याद तुझे करते हुए
    जैसे तू होता तो सीने से लगा लेता हमें

    Vikram Gaur Vairagi
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    बिछड़ते वक़्त भी हिम्मत नहीं जुटा पाया
    कभी भी उस को गले से नहीं लगा पाया

    किसी को चाहते रहने की सज़ा पाई है
    मैं चार साल में लड़की नहीं पटा पाया

    Shadab Asghar
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    हर मुलाक़ात पे सीने से लगाने वाले
    कितने प्यारे हैं मुझे छोड़ के जाने वाले

    ज़िंदगी भर की मोहब्बत का सिला ले डूबे
    कैसे नादाँ थे तिरे जान से जाने वाले

    Vipul Kumar
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    आओ गले मिल कर ये देखें
    अब हम में कितनी दूरी है

    Shariq Kaifi
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    मैं चाहता हूँ कि तुम ही मुझे इजाज़त दो
    तुम्हारी तरह से कोई गले लगाए मुझे

    Bashir Badr
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    गले लगाएँ बलाएँ लें तुम को प्यार करें
    जो बात मानो तो मिन्नत हज़ार बार करें

    Rind lakhnavi
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    चारागरी दिखा तू हमें अपने लम्स की
    हमको गले लगा के हमारा इलाज कर

    Siddharth Saaz
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    गले मुझ को लगा लो ऐ मेरे दिलदार होली में
    बुझे दिल की लगी भी तो ऐ मेरे यार होली में

    गुलाबी गाल पर कुछ रंग मुझ को भी जमाने दो
    मनाने दो मुझे भी जान-ए-मन त्यौहार होली में

    Bhartendu Harishchandra
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    गर कोई मुझसे आकर कहता, यार उदासी है
    मैं उसको गले लगाकर कहता, यार उदासी है

    होता दरवेश अगर मैं तो फिर सारी दो-पहरी
    गलियों में सदा लगाकर कहता, यार उदासी है

    Siddharth Saaz
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    गले में उस के ख़ुदा की अजीब बरकत है
    वो बोलता है तो इक रौशनी सी होती है

    Bashir Badr
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    उसने गले से हमको लगाया तो रो पड़े
    अपना बना के हाथ छुड़ाया तो रो पड़े

    मैंने ग़मों से कह तो दिया रहना उम्र भर
    वादा ग़मों ने अपना निभाया तो रो पड़े

    Vikas Sahaj
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