Hindustan Shayari
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Hindustan Shayari

    सर-ज़मीन-ए-हिंद पर अक़्वाम-ए-आलम के 'फ़िराक़'
    क़ाफ़िले बसते गए हिन्दोस्ताँ बनता गया

    Firaq Gorakhpuri
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    ये सोचके तो दूसरी कोई मिट्टी को छु'आ नही
    के बाद मरने के हिन्दुस्तां में दफनाया जाऊंगा

    karan singh rajput
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    है राम के वजूद पे हिन्दोस्ताँ को नाज़
    अहल-ए-नज़र समझते हैं उस को इमाम-ए-हिंद

    Allama Iqbal
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    हमने जिम्मेदारी दी है देश चलाने की
    फेल हुए तो उनको लानत भी हम ही देंगे

    Atul K Rai
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    बहुत मुश्किल है कोई यूँ वतन की जान हो जाए
    तुम्हें फैला दिया जाए तो हिन्दुस्तान हो जाए

    Kumar Vishwas
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    यूँ तो इस संसार में हैं और भी कितने जहाँ
    हाँ मगर सबसे अलग प्यारा मिरा हिंदोस्ताँ

    Govind kumar
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    कल कल बहती भारत की सब नदियाँ याद करेंगी
    ओ जन जन के नायक तुझको सदियाँ याद करेंगी

    Saarthi Baidyanath
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    मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना
    हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा

    Allama Iqbal
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    नफ़रतों की हार तय है ,प्रेम की बुनियाद है
    इसलिए तो देश ये था और ज़िंदाबाद है

    Aatish Alok
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    ऐसा नहीं बस आज तुझे प्यार करेंगे
    ताउम्र यही काम लगातार करेंगे

    सरकार करेगी नहीं इस देश का उद्धार
    उद्धार करेंगे तो कलाकार करेंगे

    Tanoj Dadhich
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    भारत के उपकार को, मान रहे सब लोग
    रोग 'घटाने' के लिए, दिया विश्व को 'योग'

    Divy Kamaldhwaj
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    सभी हैरत करेंगे जब नई पहचान लिख देंगे
    फ़लक पर भी हुनर से अपने हिंदुस्तान लिख देंगे

    ATUL SINGH
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    चलो ऐ हिंद के सैनिक कि लहराएँ तिरंगा हम
    जिसे दुनिया नमन करती है उस पर्वत की चोटी पर

    ATUL SINGH
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    बस ग़रीबों को नहीं थी शहर भर में छत कोई
    शुक्र है भारत में कोई तो मसीहा हो गया

    Mamta 'Anchahi'
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    इस वतन में छोटी सी बुलबुल के हूँ मानिंद मैं
    मेरा मज़हब कुछ भी हो पर हूँ तो सारा हिंद मैं

    Firdous khan
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    तुम्हारे बाद से दुनिया मुझे शमशान लगती है
    तुम्हारे बाद हर महफ़िल मुझे वीरान लगती है

    क़बा ऐसी तो पहनाकर तुझे पहचान लूँ जिसमें
    मुझे ऐसी क़बा में तू कोई शैतान लगती है

    मरुँ तो इक तिलक इसका जबीं पर भी लगा देना
    मुझे इस हिन्द की मिट्टी मिरा भगवान लगती है

    तुझे तो आस्ताँ पर दिल ने पहली बार देखा है
    कहाँ से आई है तू मौत का ऐलान लगती है

    Prashant Kumar
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    दुश्मन भी है भाई अपना
    ऐसा कहता ये भारत है

    Raushan miyaa'n
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    है नाज़ मुझको अपनी हिंदी ज़बाँ पे यारो
    हिंदी हैं हम वतन हैं ये देश सबसे आला

    Dr Mohsin Khan
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    अहम जितनी सुहागन के लिए माथे की बिन्दी है
    ज़रूरी उतनी हिन्दुस्तान के ख़ातिर ही हिन्दी है

    Manoj Devdutt
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    कुछ लोगों की ख़ातिर मिरी पहचान बदली है मगर
    अब भी मोहब्बत वाले हिंदुस्तान कहते हैं मुझे

    Meem Alif Shaz
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