Hijrat Shayari
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Hijrat Shayari

    बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं
    लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं

    नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है
    मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं

    Umair Najmi
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    लंबा हिज्र गुज़ारा तब ये मिलने के पल चार मिले
    जैसे एक बड़े हफ़्ते में छोटा सा इतवार मिले

    माना थोड़ा मुश्किल है पर रोज़ दुआ में माँगा है
    जो मुझसे भी ज़्यादा चाहे तुझको ऐसा यार मिले

    Bhaskar Shukla
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    उस हिज्र पे तोहमत कि जिसे वस्ल की ज़िद हो
    उस दर्द पे ला'नत की जो अशआ'र में आ जाए

    Vipul Kumar
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    ये सानिहा भी शब-ए-हिज्र आ पड़ा हम पर
    तेरा ख़्याल तो आया तेरी तलब न हुई

    Subhan Asad
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    इस से पहले कि बिछड़ जाएँ हम
    दो क़दम और मिरे साथ चलो

    मुझ सा फिर कोई न आएगा यहाँ
    रोक लो मुझको अगर रोक सको

    Nasir Kazmi
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    उससे तो मैं बिछड़ गया अब देख ऐ 'पवन'
    कब दुनिया आए रास यही सोचता रहा

    Pawan Kumar
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    हम कहाँ और तुम कहाँ जानाँ
    हैं कई हिज्र दरमियाँ जानाँ

    Jaun Elia
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    शब-ए-विसाल बहुत कम है आसमाँ से कहो
    कि जोड़ दे कोई टुकड़ा शब-ए-जुदाई का

    Ameer Minai
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    किस किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम
    तू मुझ से ख़फ़ा है तो ज़माने के लिए आ

    Ahmad Faraz
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    तड़पना हिज्र तक सीमित नहीं है
    उसे दुल्हन भी बनते देखना है

    Anand Verma
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    भले ही प्यार हो या हिज्र हो या फिर सियासत हो
    कुछ ऐसे दोस्त थे हर बात पर अशआर कहते थे

    Siddharth Saaz
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    जहाँ जो था वहीं रहना था उस को
    मगर ये लोग हिजरत कर रहे हैं

    Liaqat Jafri
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    मैं अपनी हिजरत का हाल लगभग बता चुका था सभी को और बस
    तिरे मोहल्ले के सारे लड़के हवा बनाने में लग गए थे

    Vikram Gaur Vairagi
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    मैं न कहता था हिज्र कुछ भी नहीं
    ख़ुद को हलकान कर रही थी तुम

    कितने आराम से हैं हम दोनों
    देखा बेकार डर रही थी तुम

    Mehshar Afridi
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    नाम पे हम क़ुर्बान थे उस के लेकिन फिर ये तौर हुआ
    उस को देख के रुक जाना भी सब से बड़ी क़ुर्बानी थी

    मुझ से बिछड़ कर भी वो लड़की कितनी ख़ुश ख़ुश रहती है
    उस लड़की ने मुझ से बिछड़ कर मर जाने की ठानी थी

    Jaun Elia
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    जाड़ों की रातें उस पर भी तुमसे ये जुदाई
    बाहों की छोड़ो हमको हासिल नहीं रजाई

    Harsh saxena
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    सुकून देती थी तब मुझको वस्ल की सिगरेट
    अब उसके हिज्र के फ़िल्टर से होंठ जलते हैं

    Upendra Bajpai
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    वो शादी तो करेगी मगर एक शर्त पर
    हम हिज्र में रहेंगे अगर नौकरी नहीं

    Harsh saxena
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    अभी तो जान कहता फिर रहा है तू
    तुझे हम हिज्र वाले साल पूछेंगे

    Parul Singh "Noor"
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    मेरे मिज़ाज की उसको ख़बर नहीं रही है
    ये बात मेरे गले से उतर नहीं रही है

    ये रोने-धोने का नाटक तवील मत कर अब
    बिछड़ भी जाए तू मुझसे तो मर नहीं रही है

    Ashutosh Vdyarthi
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