बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं
लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं
नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है
मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
लंबा हिज्र गुज़ारा तब ये मिलने के पल चार मिले
जैसे एक बड़े हफ़्ते में छोटा सा इतवार मिले
माना थोड़ा मुश्किल है पर रोज़ दुआ में माँगा है
जो मुझसे भी ज़्यादा चाहे तुझको ऐसा यार मिले
उस हिज्र पे तोहमत कि जिसे वस्ल की ज़िद हो
उस दर्द पे ला'नत की जो अशआ'र में आ जाए
इस से पहले कि बिछड़ जाएँ हम
दो क़दम और मिरे साथ चलो
मुझ सा फिर कोई न आएगा यहाँ
रोक लो मुझको अगर रोक सको
भले ही प्यार हो या हिज्र हो या फिर सियासत हो
कुछ ऐसे दोस्त थे हर बात पर अशआर कहते थे
मैं अपनी हिजरत का हाल लगभग बता चुका था सभी को और बस
तिरे मोहल्ले के सारे लड़के हवा बनाने में लग गए थे
मैं न कहता था हिज्र कुछ भी नहीं
ख़ुद को हलकान कर रही थी तुम
कितने आराम से हैं हम दोनों
देखा बेकार डर रही थी तुम
नाम पे हम क़ुर्बान थे उस के लेकिन फिर ये तौर हुआ
उस को देख के रुक जाना भी सब से बड़ी क़ुर्बानी थी
मुझ से बिछड़ कर भी वो लड़की कितनी ख़ुश ख़ुश रहती है
उस लड़की ने मुझ से बिछड़ कर मर जाने की ठानी थी
सुकून देती थी तब मुझको वस्ल की सिगरेट
अब उसके हिज्र के फ़िल्टर से होंठ जलते हैं
मेरे मिज़ाज की उसको ख़बर नहीं रही है
ये बात मेरे गले से उतर नहीं रही है
ये रोने-धोने का नाटक तवील मत कर अब
बिछड़ भी जाए तू मुझसे तो मर नहीं रही है