इश्क़ में दान करना पड़ता है
जाँ को हलकान करना पड़ता है
तजरबा मुफ़्त में नहीं मिलता
पहले नुक़सान करना पड़ता है
उस की बे-लफ़्ज़ गुफ़्तुगू के लिए
आँख को कान करना पड़ता है
फिर उदासी के भी तक़ाज़े हैं
घर को वीरान करना पड़ता है
— Mehshar Afridi
जाँ को हलकान करना पड़ता है
तजरबा मुफ़्त में नहीं मिलता
पहले नुक़सान करना पड़ता है
उस की बे-लफ़्ज़ गुफ़्तुगू के लिए
आँख को कान करना पड़ता है
फिर उदासी के भी तक़ाज़े हैं
घर को वीरान करना पड़ता है
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