बग़ैर उस को बताए निभाना पड़ता है
ये इश्क़ राज़ है इस को छुपाना पड़ता है
मैं अपने ज़ेहन की ज़िदस बहुत परेशाँ हूँ
तेरे ख़याल की चौखट पे आना पड़ता है
तेरे बग़ैर ही अच्छे थे क्या मुसीबत है
ये कैसा प्यार है हर दिन जताना पड़ता है
— Mehshar Afridi
ये इश्क़ राज़ है इस को छुपाना पड़ता है
मैं अपने ज़ेहन की ज़िदस बहुत परेशाँ हूँ
तेरे ख़याल की चौखट पे आना पड़ता है
तेरे बग़ैर ही अच्छे थे क्या मुसीबत है
ये कैसा प्यार है हर दिन जताना पड़ता है
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