हुस्न इक गुलसिताँ का माली है
आँख शहतूत बदन डाली है
मैं ने कुछ देर उदासी हँस कर
मारी है मार नहीं डाली है
साज-ओ-श्रृंगार से चमकाया बदन
एक ही नोट वो भी जाली है
— Kushal Dauneria
आँख शहतूत बदन डाली है
मैं ने कुछ देर उदासी हँस कर
मारी है मार नहीं डाली है
साज-ओ-श्रृंगार से चमकाया बदन
एक ही नोट वो भी जाली है
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