छोड़ कर जाने का दस्तूर नहीं होता था
कोई भी ज़ख़्म हो नासूर नहीं होता था
मेरे भी होंठ पे सिगरेट नहीं होती थी
उस की भी माँग में सिंदूर नहीं होता था
औरतें प्यार में तब शौक़ नहीं रखती थी
आदमी इश्क़ में मज़दूर नहीं होता था
— Kushal Dauneria
कोई भी ज़ख़्म हो नासूर नहीं होता था
मेरे भी होंठ पे सिगरेट नहीं होती थी
उस की भी माँग में सिंदूर नहीं होता था
औरतें प्यार में तब शौक़ नहीं रखती थी
आदमी इश्क़ में मज़दूर नहीं होता था
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