रूह जिस्म का ठौर ठिकाना चलता रहता है
जीना मरना खोना पाना चलता रहता है
सुख दुख वाली चादर घटती बढ़ती रहती है
मौला तेरा ताना वाना चलता रहता है
इश्क़ करो तो जीते जी मर जाना पड़ता है
मर कर भी लेकिन जुर्माना चलता रहता है
जिन नज़रों ने काम दिलाया ग़ज़लें कहने का
आज तलक उन को नज़राना चलता रहता है
— Kumar Vishwas















