आप का हुक्म था सरकार नहीं होने दिया

ख़ुद को दुनिया का तलबगार नहीं होने दिया

ऐरे-ग़ैरे को ठहरने की इजाज़त नहीं दी
दिल को दिल रक्खा है बाज़ार नहीं होने दिया

मैं ने शोहरत के लिए मिन्नत-ए-दुनिया नहीं की
इस क़दर ज़ेहन को बीमार नहीं होने दिया

वरना ये इश्क़ सुहूलत से कहाँ होना था
एक पागल ने समझदार नहीं होने दिया

शे'र कहने की तलब ने मुझे तोड़े रक्खा
और इसी शौक़ ने मिसमार नहीं होने दिया

तू फ़क़ीरों के किसी काम का पहले ही नहीं
इस लिए भी तुझे बेकार नहीं होने दिया

मैं ने उस शख़्स को क्या दिल से उतारा 'आमी'
फिर क़बीले ने भी सरदार नहीं होने दिया

— Imran Aami

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