ये जफ़ा-ए-ग़म का चारा वो नजात-ए-दिल का आलम

तिरा हुस्न दस्त-ए-ईसा तिरी याद रू-ए-मर्यम

दिल ओ जाँ फ़िदा-ए-राहे कभी आ के देख हमदम
सर-ए-कू-ए-दिल-फ़िगाराँ शब-ए-आरज़ू का आलम

तिरी दीद से सिवा है तिरे शौक़ में बहाराँ
वो चमन जहाँ गिरी है तिरे गेसुओं की शबनम

ये अजब क़यामतें हैं तिरे रहगुज़र में गुज़राँ
न हुआ कि मर मिटें हम न हुआ कि जी उठें हम

लो सुनी गई हमारी यूँ फिरे हैं दिन कि फिर से
वही गोशा-ए-क़फ़स है वही फ़स्ल-ए-गुल का मातम

— Faiz Ahmad Faiz

More by Faiz Ahmad Faiz

Other ghazal from the same pen

See all from Faiz Ahmad Faiz →

Dil Shayari

Shers of dil.

All Dil Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling