समय से पहले भले शामे-ज़िंदगी आए,
किसी तरह भी उदासी का घाव भर जाए
जो शे'र समझे मुझे दाद वाद देता रहे,
गले लगाए जिसे ग़म समझ में आ जाए
हम उदास नहीं सर ब सर उदासी हैं,
हमें चराग़ नहीं रौशनी कहा जाए
किसी के हँसने से रौशन हुई थी बादे-सबा,
कोई उदास हुआ तो गुलाब मुरझाए
— Balmohan Pandey















