वो एक पक्षी जो गुंजन कर रहा है
वो मुझ
में प्रेम सृजन कर रहा है
बहुत दिन हो गए है तुम से बिछड़े
तुम्हें मिलने को अब मन कर रहा है
नदी के शांत तट पर बैठ कर मन
तेरी यादें विसर्जन कर रहा है
— Azhar Iqbal
वो मुझ
में प्रेम सृजन कर रहा है
बहुत दिन हो गए है तुम से बिछड़े
तुम्हें मिलने को अब मन कर रहा है
नदी के शांत तट पर बैठ कर मन
तेरी यादें विसर्जन कर रहा है
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