@azhar-iqbal
Azhar Iqbal shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Azhar Iqbal's shayari and don't forget to save your favorite ones.
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माँग सिन्दूर भरी हाथ हिनाई करके
रूप जोबन का ज़रा और निखर आएगा
जिसके होने से मेरी रात है रौशन रौशन
चाँद में आज वही अक्स नज़र आएगा
गुमान है या किसी विश्वास में है
सभी अच्छे दिनों की आस में है
ये कैसा जश्न है घर वापसी का
अभी तो राम ही वनवास में है
ये भ्रामक प्रकाश ये कल्पित दीप उत्सव
दृष्टिहीन हुए तो ये सब पाया है
मर्यादा पुरूषोत्तम तो वनवास में है
सन्यासी के भेष में रावण आया है
जब भी उसकी गली में भ्रमण होता है
उसके द्वार पर आत्मसमर्पण होता है
किस किस से तुम दोष छुपाओगे अपने
प्रिये अपना मन भी दर्पण होता है
इतना संगीन पाप कौन करे
मेरे दुख पर विलाप कौन करे
चेतना मर चुकी है लोगों की
पाप पर पश्चाताप कौन करे
गाली को प्रणाम समझना पड़ता है
मधुशाला को धाम समझना पड़ता है
आधुनिक कहलाने की अंधी जिद में
रावण को भी राम समझना पड़ता है
है अब भी बिस्तर-ए-जाँ पर तिरे बदन की शिकन
मैं ख़ुद ही मिटने लगा हूँ उसे मिटाते हुए
हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं
बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं
ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो
मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं