उस से ख़्वाबों में सामना होगा
हिज्र का लुत्फ़ दो-गुना होगा
कुछ उजाले भी साथ रख लेना
दश्त-ए-दुनिया बहुत घना होगा
उस को कुछ देर देखने के लिए
पहले हर ओर देखना होगा
उस ने पूछी है मेरी ख़ैर-ओ-ख़बर
अब मुझे झूट बोलना होगा
वो भी दुनिया के तौर सीख गया
या'नी अब उस को छोड़ना होगा
— Ashu Mishra















