जी लिया और जी नहीं सकता
ख़ुद को पर, मार भी नहीं सकता
कर दिया खोखला मुझे उस ने
अब तो मैं डूब ही नहीं सकता
ज़िंदगी घूरने लगी है मुझे
यार मैं और पी नहीं सकता
जिस्म छलनी हुआ है अंदर से
ज़ख़्म ऐसे कि सी नहीं सकता
— Ashraf Jahangeer
ख़ुद को पर, मार भी नहीं सकता
कर दिया खोखला मुझे उस ने
अब तो मैं डूब ही नहीं सकता
ज़िंदगी घूरने लगी है मुझे
यार मैं और पी नहीं सकता
जिस्म छलनी हुआ है अंदर से
ज़ख़्म ऐसे कि सी नहीं सकता
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