@ashraf-jahangeer
Ashraf Jahangeer shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Ashraf Jahangeer's shayari and don't forget to save your favorite ones.
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ये उसकी मेहरबानी है वो घर में ही सँवरती है
निकल आए जो महफ़िल में तो क़त्ल-ए-आम हो जाए
उलझ करके तेरी ज़ुल्फ़ों में यूँ आबाद हो जाऊँ
कि जैसे लखनऊ का मैं अमीनाबाद हो जाऊँ
मैं यमुना की तरह तन्हा निहारूँ ताज को कब तक
कोई गंगा मिले तो मैं इलाहाबाद हो जाऊँ
बंद कमरे में हज़ारों मील अब चलते हैं हम
काफ़ी महँगी पड़ रही है शाइरी से दोस्ती
भूलभुलैया था उन ज़ुल्फ़ों में लेकिन
हमको उसमें अपनी राहें दिखती थीं
आपकी आँखों को देखा तो इल्म हुआ
क्यूँ अर्जुन को केवल आँखें दिखती थीं