ख़्वाब तुम्हारे आते हैं इतराते हैं
हम जब जब सो जाते हैं इतराते हैं
उस पर मरने वाले जितने लड़के हैं
मुझ से मिलने आते हैं इतराते हैं
सरकारी दफ्तर में बेटा नौकर है
पापा मिल कर आते हैं इतराते हैं
हम तो ख़ामोशी में डूबे हैं लेकिन
ज़ख़्म हमारे गाते हैं इतराते हैं
मैं ऐसा गुमनाम हुआ हूँ लोग मुझे
मेरा शे'र सुनाते हैं इतराते हैं
— Anand Raj Singh















