ख़ामोशी से उस की बस झगड़ा हुआ
हर अँधेरा रूह का उजला हुआ
धूप ने साए खरोंचे इस क़दर
ज़िन्दगी का रंग चितकबरा हुआ
यार ये तुकबंदियाँ क्यूँ कर भला
शा'इरी करते थे उस का क्या हुआ
बदहवा सेी दूर तक फैली हुई
मैं कि बच्चा भीड़ में खोया हुआ
वो यक़ीनन आ गए हैं लौट कर
वर्ना कैसे शहर सतरंगा हुआ
— Anand Raj Singh















