तुम जो कहते हो सुनूँगा जो पुकारोगे मुझे
जानता हूँ कि तुम ही घेर के मारोगे मुझे
मैं भी इक शख़्स पे इक शर्त लगा बैठा था
तुम भी इक रोज़ इसी खेल में हारोगे मुझे
ईद के दिन की तरह तुम ने मुझे ज़ाया' किया
मैं समझता था मुहब्बत से गुज़ारोगे मुझे
— Ali Zaryoun















