@ali-zaryoun
Ali Zaryoun, born in 1983 in Faisalabad, is a versatile multilingual poet. Dive into his diverse Shayari collection, spanning Urdu, Hindi, Farsi, Punjabi, and English, and save your favorite verses.
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अब तो पाँच मिनट के अंदर चेहरे बदले जाते हैं
जीवन मिट्टी हो जाता था एक मुहब्बत होती थी
ये तुम सब मिल के जो कुछ कह रहे हो
मैं कह सकता हूँ पर कहना नहीं है
हमारा शेर भी सुनने न आएँ
हमारा दुख जिन्हें सहना नहीं है
वो आँखें बुझ चुकी होंगी नज़ारा हो चुका होगा
'अली' वो शख़्स अब दुनिया को प्यारा हो चुका होगा
तेरा बनता था कि तू दुश्मन हो
अपने हाथों से खिलाया था तुझे
तेरी गाली से मुझे याद आया
कितने तानों से बचाया था तुझे
मैं भी इक शख़्स पे इक शर्त लगा बैठा था
तुम भी इक रोज़ इसी खेल में हारोगे मुझे
ईद के दिन की तरह तुमने मुझे ज़ाया किया
मैं समझता था मुहब्बत से गुज़ारोगे मुझे
कोई शहर था जिसकी एक गली
मेरी हर आहट पहचानती थी
मेरे नाम का इक दरवाज़ा था
इक खिड़की मुझको जानती थी
आदमी देश छोड़े तो छोड़े 'अली'
दिल मे बसता हुआ घर नहीं छोड़ता
एक मैं हूँ कि नींदे नही आ रही
एक तू है कि बिस्तर नहीं छोड़ता
एक आवाज़ कि जो मुझको बचा लेती है
ज़िन्दगी आख़री लम्हों में मना लेती है
जिस पे मरती हो उसे मुड़ के नही देखती वो
और जिसे मारना हो यार बना लेती है
मिले किसी से गिरे जिस भी जाल पर मेरे दोस्त
मैं उसको छोड़ चुका उसके हाल पर मेरे दोस्त
ज़मीं पे सबका मुक़द्दर तो मेरे जैसा नहीं
किसी के साथ तो होगा वो कॉल पर मेरे दोस्त
कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ
मैं पहली मर्तबा मिलने में सबको ऐसा लगता हूँ
ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो
वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
यार बिछड़कर तुमने हँसता बसता घर वीरान किया
मुझको भी आबाद न रक्खा अपना भी नुक़्सान किया
क्या बोला मुझे ख़ुद को तुम्हारा नहीं कहना
ये बात कभी मुझसे दुबारा नहीं कहना
ये हुक़्म भी उस जान से प्यारे ने दिया है
कुछ भी हो मुझे जान से प्यारा नहीं कहना