शाहसाज़ी में रियायत भी नहीं करते हो
सामने आके हुकूमत भी नहीं करते हो
तुम से क्या बात करे कौन कहाँ क़त्ल हुआ
तुम तो इस ज़ुल्म पे हैरत भी नहीं करते हो
अब मेरे हाल पे क्यूँ तुम को परेशानी है
अब तो तुम मुझ से मुहब्बत भी नहीं करते हो
प्यार करने की सनद कैसे तुम्हें जारी करूँ
तुम अभी ठीक से नफ़रत भी नहीं करते हो
मश्वरे हँस के दिया करते थे दीवानों को
क्या हुआ अब तो नसीहत भी नहीं करते हो
— Ali Zaryoun















