अज़िय्यत है कि रोज़-ओ-शब घुटन महसूस होती है
भले हों पास मेरे सब घुटन महसूस होती है
घुटन मेरी दीवानी है घुटन का मैं दीवाना हूँ
ज़माने को बिना मतलब घुटन महसूस होती है
मुझे तुझ पर नहीं ख़ुद पर बहुत अफ़सोस होता है
तेरे होते हुए भी जब घुटन महसूस होती है
वही जिस बाग़ में सब लोग ताज़ा साँस लेते हैं
मुझे उस बाग़ में भी अब घुटन महसूस होती है
— Ahmad Abdullah















